गुरुवार, 25 नवंबर 2010

भावनाएं क्या सिर्फ इंसानों में ही होती हैं ?

प्रस्तुति : प्रकाश गोविन्द


भावनाएं सिर्फ हम मनुष्य की ही धरोहर नहीं हैं, बल्कि ये मूक प्राणी भी भावनाओं से ओत-प्रोत होते हैं ! आईये आप भी जरा इस बात को महसूस करिए :
1
सड़क के बीचो बीच पड़ा ये पक्षी हवा से बात करती किसी वाहनरूपी काल से कुचला जा चुका है, एक पारिवारिक सदस्य की तरह दूसरा पंछी तुरंत ही उड़ता हुआ इसके पास आता है और उसे उठाने की पूरी कोशिश करता है, मानो सच्चाई स्वीकारने को वह बिलकुल तैयार नहीं |
2
उसी क्षण एक गाडी तेज़ी से गुजरती है और हवा के झोंके से मृतक पड़े पक्षी का शरीर दूसरी तरफ घूम जाता है. उसके साथी को लगता है कि वो अभी भी जिंदा है| वो जल्दी से उसके पास जाता है |
3
वो उसके पास बैठता है .. रोता है .. चीखता है. मानो कह रहा हो कि "तुम क्यों नहीं उठ रही?? "
लेकिन अब वो उसे नहीं सुन सकती |
4
वो उसे अपनी गोद में उठा लेना चाह रहा है लेकिन बेचारा असमर्थ है | तभी एक और गाड़ी आने के कारण वो उड़ता है, गाड़ी के गुजरते ही वापस आपनी साथी के पास आ जाता है|
5
दूसरे पंछियों ने बहुत समझाया पागल मत बन वो नहीं उठने वाली मर चुकी, लेकिन ये मानने को नहीं तैयार | वो उसे फिर से उड़ता देखना चाहता है , उसके साथ चहकना चाहता है | इतनी आसानी से वो उसे नहीं जाने देगा...
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फिर एक गाडी का आगमन और वापस उसका मृत शरीर हवा में नाच सा जाता .. मानो वो अभी भी जिंदा है और उड़ने की कोशिश कर रही है|
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फोटोग्राफर का दिल बेहद भावुक हो उठा और उसका दर्द नहीं देख सकता था, अपने भावावेश में जीवित पक्षी भी किसी रफ़्तार की भेट चढ़ सकता था, इसलिए फोटोग्राफर ने उस मृतक पंक्षी के शरीर को उठा उसे सड़क के किनारे रख दिया| पास के ही एक पेड़ पर बैठा उसका साथी जोर जोर से रो रहा था, वो वहां से जाने को अभी भी तैयार ना था..............

21 टिप्‍पणियां:

  1. संवेदनायें तो हर जीव मे होती हैं यहां तक कि पेड पौधों मे भी। आपकी पोस्ट ने भावुक कर दिया। शुभकामनायें।

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  2. mujhe to rulayi aa gayi is bird ko dukhi dekhkar.


    bahut udaas kar diya is post ne.
    sach men bhavnayen in pashu-paxiyon men bhi waisi hi hoti hain jaise hamaare andar hoti hain.

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  3. bahut achha laga aaj creative manch kee nayi post dekhkar.
    maanvi ji C.M.Quiz kab start hogi
    plz jaldi start karen

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  4. मार्मिक पोस्ट... वाकई कुछ कहने को नहीं मिल रहा...बस इतना जानता हूँ कि ऐसे वाकये देख चुका हूँ मैं भी...

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  5. बेहद मार्मिक !
    दुःख होता है ऐसी घटनाएँ देख कर.
    भावनाएं तो सभी प्राणियों में होती ही हैं,बस ये बेज़ुबां बोल नहीं सकते.

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  6. धन्यवाद शुभम और मानवी जी.
    हाँ..बहुत दिनों बाद आप के ब्लॉग पर कोई पोस्ट आई ..चलिये बंध टूटा तो]] लिखना ज़ारी रखीये.
    शुभकामनाएँ

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  7. 6/10

    स्मरणीय प्रस्तुति
    वाकई इन चित्रों ने व्यथित कर दिया.
    पालतू जानवरों पर कई फिल्में जैसे- 'तेरी मेहरबानियाँ' या 'हाथी मेरे साथी' की याद आज भी ताजा हैं. लेकिन पहली बार पंक्षियों की संवेदनाएं आपकी पोस्ट के द्वारा इतनी गहराई से देख पा रहा हूँ.

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  8. बहुत ही मार्मिक ......
    सच में इन बेजुबानों में भी अपनों के प्रति कितना दर्द होता है,
    मन व्यथित सा हो गया है .........

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  9. मार्मिक .... सच में संवेदनाएं हर जीव में होती हैं

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  10. हर जीव में संवेदनाएं जीवित हैं वह उन्‍हें व्‍यक्‍त अलग भावों में करता है ...बहुत ही मार्मिक चित्र प्रस्‍तुति ।

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  11. in pictures ne bahut hi bhaavuk kar diya ... aah

    bahut hi samvedansheel post hai.

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  12. maanvi ji aapki quiz ka wait kar raha hun. lagta hai aap bahut busy hain. sambhav ho to shuru kariye

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  13. फोटोग्राफर ने इसे भी एक विषय समझा यही मनुष्य के सम्वेदना है ।

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  14. mai aapke shabd ko jeene ki koshish kar raha haoon. mera ehsas aap tak pahooche.. itni mannat maang raha hoon. bahut sundar..
    rahul

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  15. mai aapke shabdon ko jeene ki koshish kar raha hoon.
    behad shaandaar hai yeh....
    meri badhai aapko.....
    rahul

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  16. यह फोटोग्राफ्स और रचनाकार निस्संदेह अद्वितीय हैं ! संवेदनशीलता के लिए बधाई

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  17. मार्मिक.. संवेदनाएं हर जीव में होती हैं

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