शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

दो उत्कृष्ट कवितायें

प्रस्तुति :- प्रकाश गोविन्द



एक दिन औरत का दिन होगा
--- जया जादवानी
एक दिन औरत का दिन होगा
एक दिन वह खिलाएगी
दूध से सनी रोटियां
दुनिया के सारे बच्चों को
एक दिन होंगी उसकी छातियां


प्रेम की नदी से भरपूर
वह चलना सिखायेगी
दुनिया की सारी सभ्यताओं को
वह हंसेगी कि
उसकी हंसी में होगी सिर्फ हंसी
और कुछ नहीं होगा
गीत फूटेंगे होंठों से
लोरियां बनकर
वह स्थगित कर देगी
सारे युद्धसारे धर्म
वह एतबार का पाठ पढ़ाएगी

एक दिन औरत का दिन होगा
जब हम जान नहीं पाएंगे उसका सुख
क्योंकि हम कभी जान नहीं पाए
दुःख उसका




उठूं
--- आशुतोष दूबे
उठूं
खींच दूं ट्रेन की ज़ंजीर
चिल्लाऊं ज़ोर से
रोको – रोको
ज़रा देख लेने दो नज़र भर
ये बहती हुई नदी कल – कल
तनिक ठहर जाओ पुल पर


उठूं
डपट दूं भरी मीटिंग में
कड़क कर आला हाकिम को
कि अब चुप हो जायें आप श्रीमान
बस‚ बहुत सुन ली आपकी आत्ममुग्ध बकवास

उठूं
अर्ज करुं शिखरवार्ता करते राष्ट्रनायकों से
अब ये तमाशा बन्द भी करो
और लो‚ दस्तख़त करो इस सयुंक्त घोषणापत्र पर
कि अपने अपने वतन के लोगों को
हम बरगलाना बन्द करेंगे
फौरन से पेश्तर

उठूं
निवेदन करुं हिन्दी के कवियों – आलोचकों से
दिमाग़ पर इतना बोझा क्यों लेते हैं आप
ज़रा अपनी मनहूसियत कम कर लें
कोशिश तो करिये!

उठूं
कहूं कविता से ढूंढ कर लाने के लिये एक शब्द
जिसमें आम के अचार की गन्ध हो
जिसके उच्चार भर से
खुल जायें
बरसों बन्द पड़े द्वार
घोर वन में या नदी में
जिसका हाथ थामे
हम हो जायें पार !

11 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई दोनों उम्दा कविताये है..

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  2. बहुत ही अच्छी कवितायें प्रस्तुत की हैं, क्रियेटिव्ह मंच को साधुवाद।

    संयोगवश आज ही पत्रिका-गुंजन के प्रवेशांक में प्रकाशित सुश्री जया जादवानी जी का आलेख को ब्लॉग पर प्रकाशित किया है।

    http://patrikagunjan.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  3. dono kavitayen chintanpurn hain.
    sahi maayane men ye dono hi rachnayen utkrasht hain
    prastuti ke liye aapka bahut dhanyvaad

    जवाब देंहटाएं
  4. जया जादवानी और आशुतोष दुबे जी की कवितायें बहुत ही अच्छी हैं .
    कई पंक्तियाँ ऐसी हैं जो मन को उद्वेलित करती हैं .
    आपका धन्यवाद जो इतनी सुन्दर कवितायें पढ़ने को मिलीं.
    मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  5. umda kavitayen aur umda peshkash

    ----- eksacchai {AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  6. जब हम जान नहीं पाएंगे उसका सुख
    क्योंकि हम कभी जान नहीं पाए
    दुःख उसका…।
    लाजवाब अभिव्यक्ति है
    जिसके उच्चार भर से
    खुल जायें
    बरसों बन्द पड़े द्वार
    घोर वन में या नदी में
    जिसका हाथ थामे
    हम हो जायें पार!
    शायद इस ब्लोग पए आने मे बहुत देर कर दी और इतने समय मे बहुत उत्कृष्ट रचनायें पढने से वंचित रह गयी खैर देर आये दुरुस्त आये बहुत सुन्दर भावमय रचनायें हैं एक सार्थक प्रयास बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  7. जया जी और आशुतोष जी दोनो की बहुत सुन्दर कविताओं का आपने चयन किया है । आपका धन्यवाद् -शरद कोकास

    जवाब देंहटाएं

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