बुधवार, 13 जनवरी 2010

श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता - 1 का परिणाम

प्रतियोगिता संचालन :- - प्रकाश गोविन्द


मकर संक्रांति कि शुभकामनाएं

पहले जब मैं पत्रिकाएं पढता था तो उनमें एक परिशिष्ट ऐसा ही होता था ! चित्र दिया होता था और पाठक लोग सुन्दर-सारगर्भित पंक्तियों का सृजन करते थे ! मुझे वो प्रष्ट बहुत भाता था ...... सबसे पहले मैं उसी प्रष्ट को देखता था ! समय बदल गया .... लोगों के सोचने का द्रष्टिकोण बदल गया ! आज पत्रिकाओं में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता ! पहले हम लोग पत्र लिखते थे ... अक्षर-अक्षर महकते थे ! अपनी सारी भावनाएं शब्दों में पिरो देते देते थे ! अब फोन, एस.एम.एस. और ई-मेल का ज़माना है ! आज हम दूसरों के दिमाग तक पहुंचना चाहते हैं भले ही दिल तक न पहुंचे !

खैर .....
इस आयोजन की भूमिका बहुत पहले से मन में थी ! बस हिम्मत नहीं पड़ रही थी .. सोच रहा था कि भला कौन पड़ेगा इस झमेले में ? इतना समय किसके पास है ? फिर भी सोचा कि चलो एक भी प्रतियोगी ने अगर सार्थक पंक्तियाँ लिख दीं तो आयोजन सफल मान लूँगा ! लेकिन जिस तरह से सजग रचनाशील पाठकों ने इसमें हिस्सा लिया वह मेरे लिए अत्यंत आश्चर्य-मिश्रित प्रसन्नता की बात है !

जानता हूँ कि इस तरह किसी चित्र को देखकर यकायक कुछ रचनात्मक लिखना आसान नहीं होता ! इसीलिए पाठकों ने आयोजन में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी, यही हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात है ! कुछ प्रतियोगियों ने 'माडरेशन ऑन' रखने का सुझाव दिया था ! उनके सुझाव को मानते हुए अब "श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता" में 'माडरेशन ऑन' रखा जाएगा ! आप सभी का बहुत-बहुत आभार/बधाई

श्रेष्ठ सृजन के चयन का निर्णय पूरी तरह हमने आदरणीय शिखा वार्ष्णेय जी पर छोड़ दिया था ! आईये देखते हैं उन्होंने किन तीन प्रतियोगियों द्वारा सृजित पंक्तियों का चुनाव किया है !

श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता-1 में 'श्रेष्ठ सृजन' का चयन

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आप सभी को नमस्कार !

सबसे पहले मैं क्रिएटिव मंच का शुक्रिया अदा करती हूँ कि उन्होंने मुझे इस प्रतियोगिता के निर्णायक बनने के लायक समझा . श्रेष्ठ सृजन जैसी सार्थक प्रतियोगिता के माध्यम से बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ पढने को मिलीं. आप सबकी रचनात्मकता उत्कृष्ट है ,सबने बहुत ही अच्छा लिखा है ,और मेरे लिए बहुत ही कठिन था - इनमे से श्रेष्ठता के पैमाने पर चयन करना, पर चूँकि मुझे ये जिमेदारी दी गई है, आशा है आप सभी लोग खुले दिल से मेरे निर्णय को स्वीकार करेंगे !

अत मैं निम्नलिखित प्रतिभागियों का चुनाव करती हूँ


'श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता' में दिए गए चित्र और सर्वश्रेष्ठ चयनित पंक्तियों पर एक नजर :
s.s.-1
श्रेष्ठता के क्रमानुसार चयनित प्रविष्टियाँ :

[प्रथम]

देखता हूँ
अखबार की नजरों से
जब दुनिया..
सोचता हूँ
मेरे दुख,
मेरी गरीबी
और
मेरी मजबूरियाँ
कितना बौना है उनका कद!!

[ पंक्तियों में चित्र का सार पूरी तरह समाहित है ]

[द्वितीय]

शायद किसी पन्ने पर मेरी तकदीर हो
मंहगाई को रोकने की कोई तहरीर हो.

[पंक्तियाँ चित्र में दिखाए व्यक्ति की मनोस्थिति को दर्शाती हैं.]

[तृतीय]

जूते चप्पलों की मरम्मत करूँ
मेरी रोज़ी रोटी मेर कर्म है
देश दुनिया की खबरे पढूं
ये मेरा नागरिक धर्म है.

[पंक्तियाँ कर्म और धर्म दोनों की व्याख्या करती हैं.]
श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम
श्रेष्ठ सृजन के प्रथम विजेता : समीर लाल जी 'समीर'
udan tashtari ji.psd
************************************************************
श्रेष्ठ सृजन की द्वितीय विजेता : निर्मला कपिला जी
Nirmla Kapila
************************************************************
श्रेष्ठ सृजन के तृतीय विजेता : सुलभ "सतरंगी" जी
sulabh satrangi
************************************************************
जिन अन्य प्रतियोगियों के सृजन ने विशेष रूप से प्रभावित किया :
manoj kumar.psd alpz09 shivendra
roshni ji shamim shamim.psd
************************************************************
************************************************************
srajan 2

आईये अब चलते हैं "श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता - 2" की तरफ !
नीचे एक चित्र दिया गया है ! आपको बस चित्र के भावों का समायोजन करते हुए रचनात्मक पंक्तियाँ लिखनी हैं ! 'पहले अथवा बाद' का इस प्रतियोगिता में कोई चक्कर नहीं है अतः आप इत्मीनान से लिखें ! 'माडरेशन ऑन' रहेगा ! प्रत्येक प्रतियोगी की सिर्फ एक प्रविष्टि पर विचार किया जाएगा, इसलिए अगर आप पहली के बाद दूसरी अथवा तीसरी प्रविष्टि देते हैं तो पहले की भेजी हुयी प्रविष्टि पर विचार नहीं किया जाएगा ! प्रतियोगी की आखिरी प्रविष्टि को ही हम फाईनल मान लेंगे
---- क्रियेटिव मंच
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ध्यान से देखा आपने ये चित्र ?

क्या इसको देखकर आपके दिल में कोई भाव ...कोई विचार ... कोई सन्देश उमड़ रहा है ?

तो बस चित्र से सम्बंधित भावों को शब्दों में व्यक्त कर दीजिये ... आप कोई सुन्दर सी तुकबंदी ... कोई कविता - अकविता... कोई शेर...कोई नज्म..कोई दिल को छूती हुयी बात कह डालिए ! क्या कहा आपने ? कविता वगैरह में हाथ तंग है ? .... अरे तो फिर गद्य में दो-चार अच्छी सी पंक्तियाँ लिख डालिए ! बात तो दिल तक पहुँचने की है न ?

इतना अवश्य ध्यान रहे लेखन में मौलिकता होनी चाहिए ! पंक्तियाँ स्वयं आपके द्वारा रचित होनी चाहिए ! परिणाम के बाद भी यह पता चलने पर कि पंक्तियाँ किसी और की हैं, विजेता का नाम निरस्त कर दिया जाएगा !

प्रतियोगिता में शामिल होने की समय सीमा रविवार 18 जनवरी शाम 5 बजे तक है ! "श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता- 2" का परिणाम अगले बुधवार 20 जनवरी 2010 रात्रि सात बजे प्रकाशित किया जाएगा !
----- क्रिएटिव मंच
The End

45 टिप्‍पणियां:

  1. न इसकी बात न उसकी बात,
    आ करें हम बचपन की बात !
    जिन्‍हें सुनकर तुम मुस्‍कराओगी,
    और मैं भी खुलकर हंस पाऊंगी ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पहले तो विजेताओं को बधाई
    उसके बाद आयोजकों को
    और निर्णायक को एक जोरदार मुबारकबाद
    उनको जोरदार इसलिए कि
    वे नहीं ले सकती भाग
    सिर्फ विजेता का भाग्‍य बतला सकती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. हंसी की कोई उम्र नहीं होती
    हंसी जीवंत जिंदगी होती है
    हंसी मन में बसी होती है
    हंसी तन में रची होती है।

    हंस कर खिलखिलाने से
    मौसम खिल जाता है
    हंसी से हर चेहरा मन
    तक पावन हो जाता है।।

    हंसी जब आती है मान लो
    पतझड़ में भी सावन आता है।।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सब से पहले तो इस प्रतियोगिता के सभी आयोजकों और प्रतिभागिओं के लोहडी की शुभकामनायें। ये प्रतियोगिता सही मे क्रियेटिवे मँच के क्रियेटिवे शब्द को सच करती है। पहली प्रतियोगिताओं मे वही लोग हिस्सा ले सकते थे जिन्हों ने दुनिया के बारे मी पूरी जानकारी रखी हो या जो नेट की खोज मे पारंगत हों ,समय भी जिन के पास हो। मगर इस सृजनात्मक पहेली मे अगर समय भी लगे तो वो कुछ सीखता है समय को सार्थक करने वाले इस आयोजन के लिये बहुत बहुत बधाई। पहेली के लिये फिर आती हूँ ।

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  5. इस सृजनात्मक प्रतियोगिता में शामिल होने वाले सभी प्रतियोगियों को बधाई.

    सफल संचालन के लिए क्रिएटिव सदस्यों को बधाई.

    - सुलभ

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  6. जीवन की जिम्मेदारी पूरी कर ली सारी
    अब दो पल अपने लिए बिताये
    बैठ अपनी सहेली के संग
    थोडा हँसे थोडा मुस्काए

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  7. सभी विजयी रचनाकारों को बहुत शुभ कामनाएं
    आपका यह प्रयास अत्यधिक सराहनीय है
    लाजवाब

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  8. sameer ji, nirmala ji aur sulabh ji ko badhayi.
    bahut sundar post
    winners ka selection bilkul uchit kiya shikha ji ne

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  9. श्रेष्ठ सृजन के विजेताओं को हार्दिक बधाई
    बेहद सुन्दर आयोजन

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  10. ब्लॉगर संगीता पुरी ने कहा…

    विजेताओं को बधाई .. इन साहित्‍यकारों के सामने भला हमारी क्‍या चलने वाली ??

    १३ जनवरी २०१० १२:५२ PM

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  11. विजेताओं को बधाई।
    आयोजक को आभार।
    एक बहुत ही अच्छी प्रतियोगिता में भाग लेकर काफी अच्छा लग रहा है।
    लोहड़ी पर्व की बधाई।

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  12. फूलों संग बैठी दो बहने
    हंसी ख़ुशी आराम है
    जिंदगी जी भर कर जियो
    क्या सुबह क्या शाम है

    - सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

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  13. सृजन प्रतियोगिता दो के लिये मेरी पंम्क्तियां ये हैं

    बचपने की कुछ यादें आज होठों पर आयी हैं
    करके याद उन्हें फिर दोनो सखियाँ मुस्काइ हैं।

    शुभकामनायें और विजेताओं को बधाई आयोजकों को भी बधाई और शुभकामनायें

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  14. आवश्यक सूचना :

    स्पष्ट निर्देश न होने की स्थिति में प्रतियोगियों द्वारा एक से अधिक प्रविष्टि भेजने पर उनकी अंतिम प्रविष्टि पर ही विचार किया जाएगा !

    ---- क्रिएटिव मंच

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  15. समीर जी को ढेरों बधाई उनकी काव्य क्षमता अद्भुत है.यह कविता बहुत अच्छी थी.
    निर्मला जी और सुलभ जी सभी को बहुत बहुत बधाई.
    शिखा जी आगे aage यह प्रतियोगिता टक्कर की यानी कठिन होने वाली है....:) अविनाश जी भी आ गये हैं ....
    सभी साथी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ अगले अंक के liye..

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  16. सभी विजेतओ को बहुत बहुत बधाई

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  17. वाह....बहुत बढ़िया प्रतियोगिता,

    सभी विजेताओं को बधाई....और नयी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनायें

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  18. sabhi vijetao ko bahut bahut badhai...bahut sundar pratiyogita aur ek sarthak nirnay...sabhi ko shubhkamnaye...

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  19. समीर जी, निर्मला जी और सुलभ जी को बहुत बहुत बधाई...शिखा जी का काम कठिन था,पर उन्होंने बहुत ही सुगमता से इसे अंजाम दिया वे भी बधाई की पात्र हैं........ ..और आयोजकों को शुक्रिया इस आयोजन के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  20. प्राचीन प्रस्तुति का एक नया रूप देख कर ख़ुशी हुई. इस नए सृजनात्मक स्वरूप को रूप देने के लिए बहुत बहुत बधाई और उनको भी जिन्होंने चित्र को शब्दों में ढाला है.

    समीर जी, निर्मला जी और सुलभ जी को बहुत बहुत बधाई.
    शिखाजी आप के निर्णय भी काबिले तारीफ हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  21. शिखा जी आप कि निर्णय क्षमता पर विश्वास है परन्तु [कृपया ]इस सुझाव को अन्यथा ना लें,
    चूँकि यह प्रतियोगिता है और सार्वजनिक मंच पर है..
    इसीलिए बेहतर है कि निर्णायक टीम में कम से कम तीन सदस्य हों.यह महज एक सुझाव है.
    अमल में लाना ना लाना, क्रियेटिव टीम पर निर्भर करता है.

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  22. सब से पहले तो इस प्रतियोगिता के सभी आयोजकों और प्रतिभागिओं मकर संक्रांति कि शुभकामनाएं.समीर जी, निर्मला जी और सुलभ जी को बहुत बहुत बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  23. आवश्यक सूचना :

    प्रतियोगियों से आग्रह है कि कृपया प्रतियोगिता सम्बन्धी अपनी प्रविष्टियाँ (सृजित पंक्तियाँ) ई-मेल के द्वारा न भेजकर यहीं कमेन्ट बॉक्स के जरिये दें !

    ------ क्रिएटिव मंच

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  24. सभी विजेताओं को बधाई ,शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं
  25. सभी को बहुत-बहुत बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  26. सबसे पहले तमाम विजेताओं
    को मेरी ह्रदयिक शुभकामनाएं|


    इस तस्वीर के लिए शीर्षक होना चाहिए-

    "आओ! बीती यादें ताज़ा करें..."




    "आओ! बीती यादें ताज़ा करें

    थोडा हंसें थोडा रो लें

    चलो चलें उस दुनिया में

    जब हम तुम दोनों बच्चे थे

    सोचो कल के वो पल

    इस पल से कितने अच्छे थे!..."




    शुभ भाव


    राम कृष्ण गौतम

    उत्तर देंहटाएं
  27. ब्लॉगर रामकृष्ण गौतम ने कहा…

    सबसे पहले तमाम विजेताओं को मेरी ह्रदयिक शुभकामनाए... सबसे पहले तमाम विजेताओं
    को मेरी ह्रदयिक शुभकामनाएं|

    इस तस्वीर के लिए शीर्षक होना चाहिए-
    "आओ! बीती यादें ताज़ा करें..."

    शुभ भाव

    उत्तर देंहटाएं
  28. sameer ji, nirmala ji aur sulabh ji ko bahut bahut mubarakbaad

    bahut hi sundar aayojan
    aapko bhi badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  29. सभी विजेताओं को बधाई ,शुभकामनाएं .

    उत्तर देंहटाएं
  30. सताए जब कोई ग़म पास आके
    तो ज़ोर-ज़ोर से लगाओ ठहाके
    ये क्या तू-तू, मैं-मैं लगा रखी है
    ज़िन्दगा कैसे जीते हैं देखो यहां आ के।

    उत्तर देंहटाएं
  31. वक़्त हमारे लिए
    अब किसी के पास नहीं,
    चलो बाँटें
    पलों को हास से.
    कट जायेगी
    यूँ ही जिन्दगी.
    क्यों सोचें?
    कि
    कोई हमारे पास नहीं.

    --रेखा श्रीवास्तव

    उत्तर देंहटाएं
  32. सभी विजेताओ को बधाई
    मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाओ सहित !!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  33. अल्पना जी! ये प्रतियोगिता मैने नहीं आयोजित की.. मुझे यहाँ बुलाया गया था इस काम के लिए ...सो ये निर्णय creative manch कि टीम का ही रहा होगा ...वैसे आपने बिलकुल ठीक कहा ...३ नहीं ५ लोग होने चाहिए बल्कि मेरे ख्याल से तो हर प्रतियोगिता के लिए नए judge होने चाहिए .,ताकि विविधता भी बनी रहे

    उत्तर देंहटाएं
  34. Title-ढलती छाँव तले
    ------------------

    ना व्यथित हों हम ,
    पुरानी किसी भी बात पर,
    अब हो हर पल मुस्कराता,
    हंसता और गाता,
    कुछ कहो तुम और मैं भी कुछ सुनाती चलूं,
    वक़्त है बस कुछ ही शेष ,
    सांझ भी ढलने लगी!

    आ सखी ,गुज़ार लें
    कुछ मधुर पल और
    उम्र के इस पड़ाव पर!

    --

    उत्तर देंहटाएं
  35. आदरणीय क्रियेटिव मंच टीम, टिप्पणियाँ प्रकाशन में कोई समस्या आ रही है शायद! मेरी टिप्पणी पूरी प्रकाशित नही हुई है! कृपया ध्यान दीजिए....



    Regards


    Ram K Gautam

    उत्तर देंहटाएं
  36. @ प्रिय रामकृष्ण जी आप चिंतित न हों ! आपकी प्रविष्टि हमारे पास पूर्णतयः सुरक्षित है !

    "माडरेशन ऑन" होने की वजह से आपके द्वारा प्रतियोगियों को दी हुयी शुभकामनाओं को अलग प्रकाशित करना पड़ा था !
    स्नेह सहित
    ---------- क्रिएटिव मंच

    उत्तर देंहटाएं
  37. मानवी जी यह बहुत ही अच्छा आयोजन था वक्त की कमी होने के बावजूद भी इस प्रतियोगिता ने भाग लेने के लिए प्रेरित किया. इसमें सृजनता के साथ मनोरंजन भी है. प्रतियोगिता में एक नया प्रयोग आपका सफल रहा. यह आपका सराहनीय प्रयास है इसके लिए आप और आपका मंच बधाई के पात्र हैं. बहुत बहुत बधाई... शिखा वार्ष्णेय जी आपने बेहद सही निर्णय लिया....इसके लिए आप भी बधाई की पात्र हैं...
    सभी विजेताओं को बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं
  38. श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता --- २ के लिए


    अरसे बाद मिला है नसीब को इतना खिलखिलाना
    वर्ना तो भूल चुके थे हम कभी का मुस्कुराना
    वो बातों की लज्ज़त और बीते हुए लम्हे
    आ गया याद मिल कर , वो गुज़ारा ज़माना

    उत्तर देंहटाएं
  39. "गुजरा जमाना"

    प्यारी सखी याद आ गए वो गुजरे ज़माने
    वो प्यारे लम्हें जो बचपन में बिताये हमने
    आओ मिलकर कुछ मंजर बनाये
    गुजर जाने से पहले जीवन खुशहाल बनाये......

    उत्तर देंहटाएं
  40. "श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता - 2"

    "जीवन संध्या"
    सखी इस संध्या वेला मे याद दिला दी तुमने
    बचपन कि ; आओ बैठो जी ले फिर उन दिनों को, ना जाने फिर कब मिलना हों!

    उत्तर देंहटाएं
  41. फिर मिलेंगे..

    हम भी कभी जवां थे,
    दिनभर शरारत किया करते थे ।
    हमारी मासूम अदाओं पर,
    तब, लड़के हजारों मरते थे ।

    वर्षों बाद मिलें हैं हम आज ,
    पुरानी यादें ताजा हो आई हैं ।
    हर साल यहीं मिलेंगे हम,
    अब,कसम दोस्ती की खाई है।

    उत्तर देंहटाएं
  42. "मैंने गोद ले लिया आपको"
    आज बहुत दिनों बाद बुआ को हँसते देखा है अपनी बड़ी बहन से मिलकर बेहद खुश है और अपने कुछ पुराने आनंददायक क्षणों को याद कर रही है.....
    बुआ जो अब वृद्धावस्था में पहुँच चुकी है...
    उनका सब कुछ खो गया ...
    नियति ने उनके साथ बहुत क्रूर मजाक किया है....
    माँ और एकलौता भाई बचपन में खो दिया....शादी हुई तो ३ साल बाद पति और दो साल बाद ही, एक बेटी थी दोनों चल बसे.....
    इन हादसों से उबरते हुए बुआ ने अपने गाँव में पाठशाला, अस्पताल बनवाए.
    कई सामाजिक कार्य किये....
    यह उनके ससुराल वालों को सहन नहीं हुआ उन्हें चालाकी से उनके जायदाद से बेदखल कर दिया.
    सौतेले भाई ने बहन को अपने पास रखा लेकिन सौतेली माँ को यह कभी भी रास ना आया.
    अब परिवार में एक भी ऐसा घर नहीं जो पहली दादी की इस बेटी को अपने घर रखे.
    इन्हें ठीक से दिखाई नहीं देता कला मोतियाबिंद के कारण.
    परिस्थितियाँ और अधिक ख़राब होती उसके पहले ही हमने बुआ को गोद ले लिया.
    वैसे भी हमारे कोई संतान नहीं है एक बेटी गोद लेने की इच्छा थी तो हमने बुआ को ही गोद ले लिया तो अब बुआ ही हमारी बेटी हुई ना!....
    और हम अपनी इस बेटी को बेहद प्यार करते हैं.
    हर माँ- बाप को अपनी बेटी को विदा करना होता है.
    जब बुआ इस संसार को अलविदा कह जाएँगी तो हम उनकी वैसे ही विदाई करेंगे जैसे एक लड़की के माँ- बाप करते हैं......
    आह! दोनों बहनों को हँसते- खिलखिलाते देख बहुत अच्छा लग रहा है.............

    उत्तर देंहटाएं
  43. एक मुलाकात-बहुत दिनों के बाद

    स्टेफी, तुम कैसी हो ।
    अरी मार्टिना, तू बता तू कैसी है, बहुत दिनों के बाद दर्शन हुए तेरे ।
    बस मर्निंग वाक पर निकली थी ………मैं अच्छी हूं । डायबिटिज ने परेशान कर रखा है ।
    तू क्या अभी भी शक्कर वाली चाय पिती है ।
    हां यार , आदत छोडे नहीं छूटती । और बच्चें कैसे हैं ।
    बिलकुल बाप पर गए हैं । और तू बता तेरे मियां आजकल क्या कर रहे हैं ।
    बस वही पुरानी आदत , दिनभर फिशिंग ।
    हा हा हा बडी मछली तो उन्होंने पहले ही फंसा लिया था ।
    तू भी न बस
    आजकल फैंस के पत्र आते हैं क्या ?
    हां, आज भी मेरे उतने ही प्रशंसक हैं जितना पहले हुआ करते थे । तेरा टाइम पास कैसे होता है ।
    मैंने तो हिंदी सीख ली है और दिनभर ब्लागिंग करती रहती हूं ।अपने प्रशंसकों के लिए लिखती हूं , उन्हें भी प्रोत्साहित करती रहती हूं।
    अच्छा अगले हफ्ते डिनर पर आना ।
    जरुर आऊंगी । अब धूप निकलने वाली है । मैं चलूंगी ।

    उत्तर देंहटाएं
  44. हंसना ही जिंदगी है

    हंसने से रहती हैं , हमेशा सौ बिमारियां दूर ।
    जरा हमें भी देखो ,है अभी भी चेहरे पर नूर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  45. विजेताओं को हार्दिक बधाई
    और मेरी रचना आने में देर हो गई है लेकिन बस मन हुआ लिख दूं तो लिख रही हूँ

    तू है तो ज़िन्दगी है मेरी
    तू ही तो ख़ुशी है
    तेरी हंसी में है छुपी मेरी हंसी है
    ता उम्र साथ तू रही है बन के आईना
    तेरे बिना हस्ती मेरी कुछ भी तो नहीं है

    उत्तर देंहटाएं

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