बुधवार, 6 जनवरी 2010

श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता - 1

प्रतियोगिता संचालन :- - प्रकाश गोविन्द


srajan 1
कुछ दिनों पहले हमने पाठकों एवं प्रतियोगियों से क्विज के समय से सम्बंधित राय मांगी थी ! वोटिंग के जरिये अधिकतर लोग क्विज का समय सुबह रखने के पक्ष में थे ! बहुत से लोगों ने -मेल के द्वारा भी अपनी राय व्यक्त की और दिन भी परिवर्तित करने का अनुरोध किया था !

जिसके आधार पर क्रिएटिव मंच की टीम ने निर्णय लिया है कि अब C.M.Quiz प्रत्येक रविवार (Sunday) को सुबह - दस बजे आयोजित की जायेगी ! सभी प्रतियोगी रविवार को सवेरे दस बजे क्विज में शामिल होना न भूलें !

आज भी एक छोटा सा आयोजन किया गया है और अगर आप चाहेंगे तो यह आयोजन हर बुधवार को इसी समय किया जाएगा. इसके अंतर्गत एक चित्र दिखाया जाएगा. चित्र को देख कर एक उपयुक्त शीर्षक सुझाना होगा

सब से अधिक सटीक शीर्षक को हमारी निर्णायक टीम चुनेगी जिनका फ़ैसला अंतिम माना जाएगा।

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प्रतियोगिता में शामिल होने की समय सीमा रविवार शाम चार बजे तक है ! उसके उपरान्त प्रतिक्रिया / प्रविष्टि को परिणाम में शामिल कर पाना संभव नहीं होगा !
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s.s.-1
शीर्षक बताईये
ध्यान से देखा आपने ये चित्र ?

क्या इसको देखकर आपके दिल में कोई भाव ...कोई विचार ... कोई सन्देश उमड़ रहा है ?

अगर आप चाहें तो शीर्षक बताने के अतिरिक्त चित्र से सम्बंधित कोई सुन्दर सी तुकबंदी ... कोई कविता - अकविता... कोई शेर...कोई नज्म..कोई दिल को छूती हुयी बात कह सकते हैं !

इतना अवश्य ध्यान रहे लेखन में मौलिकता होनी चाहिए ! पंक्तियाँ स्वयं आपके द्वारा रचित होनी चाहिए !

"श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता- 1" का परिणाम
अगले बुधवार रात्रि सात बजे प्रकाशित किया जाएगा !

35 टिप्‍पणियां:

  1. ye kya ???
    ek nayi museebat
    lekin badhiya hai
    sirf sheershak hi bataana hai to mai sheershak deti hun -
    "Mera Bharat Mahaan"

    iske alava kavita likhna to apne bas ki baat nahi hai

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  2. ha,,,ha,,,ha,,ha
    naya aayojan .... lekin ye to bahut creative mind logon ke liye hai. mai to zero hun.
    sirf sheershak sujha sakta hun.
    iska sheershak hona chaahiye---
    [ jaago bharat jaago ]

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  3. साक्षर हूँ दुनिया कि खबर रखता हूँ!

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  4. शीर्षक :

    अपनी न कुछ खबर है
    दुनिया पे तो नजर है

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  5. बहुत अच्छी शुरुआत।
    शीर्षक -- यूं ही ... बस ...
    मेरी भी हो जाए बल्ले-बल्ले
    पेड़ तले यूं ही बैठे रहें निठल्ले
    और हाथ में मेरे हो अख़बार
    जिस में हो हिरोइनों का इश्तहार।

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  6. <a
    आदरणीय मानवी जी,

    जो चित्र आपने सुझाया है, उससे स्पष्ट है कि अखबार हाथ में लिए बैठा व्यक्ति एक मोची है। यह भी जाहिर है कि वह आराम के क्षणों में अखबार पढ़ रहा है। िफलहाल उसकी दुकान पर कोई ग्राहक नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए इस चित्र का सटीक शीर्षक ``फुर्सत के पल...`` या िफर ``ये आराम का मामला है!`` होना चाहिए।


    शुभ भाव

    राम कृष्ण गौतम

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  7. ये शीर्षक कैसा रहेगा :
    "बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर"

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  8. शीर्षक: नज़रिया

    देखता हूँ
    अखबार की नजरों से
    जब दुनिया..

    सोचता हूँ

    मेरे दुख,
    मेरी गरीबी
    और
    मेरी मजबूरियाँ

    कितना बौना है उनका कद!!

    -समीर लाल ’समीर’

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  9. 'फ़ुर्सत के पल में लेते हैं दुनिया की खबर'

    कुछ अच्छा shirshak समझ नहीं आ रहा

    उत्तर देंहटाएं
  10. शीर्षक- दो पल का सुख ।

    दो वक्त की रोटी के लिए , करना पडता है दिनभर काम,
    फुर्सत के क्षण में पढता, मनोरंजन की खबरें तमाम ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. काश हमारे देश में साक्षरता अभियान सफल हो।
    देश दुनिया के हर समाचार में सबकी नजर हो।।

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  12. शीर्षक -- दिल ढ़ूंढ़ता है ..
    विचार --
    हो न उदास ज़िन्र्दगी, तू मुस्कुराती जा,
    ग़रीबी के पलों में भी हंसी के फूल खिलाती जा।
    ग्राहक आए-या न आए मेरी दुकान पे,
    हर हाल में ख़ुशियों के गीत गुनगुनाती जा।

    उत्तर देंहटाएं
  13. शीर्षक-बदलती हवा
    शिक्षित बेरोज़गारों की बढ़ती संख्या से नयी पीढ़ी का नज़रिया बदलने लगा है श्रम का महत्व समझे तो कोई काम उनके लिए छोटा या बड़ा नहीं है..उसी सन्दर्भ में ये swrachit पंक्तियाँ हैं--

    'शिक्षित हूँ बेकार नहीं'
    काम कोई छोटा ना बड़ा,
    करने से लाचार नहीं.

    उत्तर देंहटाएं
  14. शीर्षक-बदलती हवा
    शिक्षित बेरोज़गारों की बढ़ती संख्या से नयी पीढ़ी का नज़रिया बदलने लगा है श्रम का महत्व समझे तो कोई काम उनके लिए छोटा या बड़ा नहीं है..उसी सन्दर्भ में ये swrachit पंक्तियाँ हैं--

    'शिक्षित हूँ बेकार नहीं'
    काम कोई छोटा ना बड़ा,
    करने से लाचार नहीं.

    उत्तर देंहटाएं
  15. *शायद किसी पन्ने पर मेरी तकदीर हो
    मंहगाई को रोकने की कोई तहरीर हो*

    ये प्रयास बहुत अच्छा लगा। मेरा शीर्शक उपर लिखा है। शायद ये आदमी अखबार पढते हुये यही खोज रहा है। धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  16. *शायद किसी पन्ने पर मेरी तकदीर हो
    मंहगाई को रोकने की कोई तहरीर हो*

    ये प्रयास बहुत अच्छा लगा। मेरा शीर्शक उपर लिखा है। शायद ये आदमी अखबार पढते हुये यही खोज रहा है। धन्यवाद्

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  17. अरे वाह, अभी दो-तिन पहले मैं एक कार्यक्रम से लौटा तो सोचा की क्यूँ न एक शीर्षक प्रतियोगिता जैसा आयोजन हो. आपने मन की बात सुन ली..

    बहुत अच्छा किया इसे शुरू कर. बहुत बधाई आपको.

    -सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

    उत्तर देंहटाएं
  18. ये लीजिये, एक साकारात्मक शीर्षक -


    "जूते चप्पलों की मरम्मत करूँ
    मेरी रोज़ी रोटी मेर कर्म है
    देश दुनिया की खबरे पढूं
    ये मेरा नागरिक धर्म है "

    - सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

    उत्तर देंहटाएं
  19. आज टिपण्णी मोडरेशन ऑन नहीं है. इसका मतलब क्या है समझा नहीं.
    इस प्रकार के सृजनात्मक कार्यक्रम में शीर्षक भेजनेवालों को प्राय एक ही शीर्षक सोच समझ कर भेजना चाहिए.
    इससे आयोजकों को निर्णय में सुविधा होती है. टिप्पणियों के अम्बार से कई बार प्रतियोगिता अपना महत्व खो देती है.

    ये मेरे विचार मात्र है, आपने माँगा इसलिए दिया है. बाकी आपका निर्णय सर्वमान्य है.


    -सुलभ

    उत्तर देंहटाएं
  20. "ई भैय्या आराम से बैठन भी दो हमें..."
    का कहा? कोउन आया है? ...
    ओहो!.... क्रिएटिव मंच के लोग हैं.....कह दो भैय्या सबसे.. अपने अपने जूते ईहाँ छोड़ जावें अभी हम थोड़ा आराम करत हैं.....औ हाँ! सबको हमरा राम राम कहना मत भुलियेगा.....

    उत्तर देंहटाएं
  21. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  22. शिक्षा से आई है चेतना, जन जन में है जागरण
    मैं बनाता देश को उन्नत, हूँ किसान मैं साधारण
    सारे विश्व की ख़बरें मुझको दे जाता है ये अखबार
    नए तज़ुर्बे, नई तकनीक, क्या नए है उपकरण

    उत्तर देंहटाएं
  23. शीर्षक - रांपी और टॉकी।
    इस बिम्ब को देखकर यही बोध होता है --

    हाथ में हूनर है काम करने की,
    दिमाग में शक्ति है अखबार पढ़ने की।

    उत्तर देंहटाएं
  24. सुंदर आयोजन
    पसंद आया ...सबको पढ़ना भी अच्छा लगा.
    मेरे ख्याल से शीर्षक होना चाहिए :
    "ख्वाब"

    रहो जमीं पे मगर आसमां का ख्वाब रखो
    तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो

    [ये शेर मैंने नहीं लिखा है और यह भी नहीं पता कि किसका है ? ]

    उत्तर देंहटाएं
  25. मेरे ख्याल से भी अगली बार से मॉडरेशन ऑन रखिये.

    उत्तर देंहटाएं
  26. @ सुलभ 'सतरंगी' जी मोडरेशन जान बूझकर ऑन नहीं रखा गया है !
    कारण है कि अभी सर्वथा नया आयोजन है ! नए लोगों को समझने में आसानी रहेगी साथ ही प्रेरणा भी मिलेगी ! किसी चित्र को देखकर यकायक पंक्तियाँ सृजित करना इतना आसान नहीं होता है ...... ऐसे में अगर अन्य प्रतियोगियों के लेखन को पढ़कर चित्र के भाव समझने में मदद मिलती है तो इसमें हर्ज नहीं है ! आशा है आप समझेंगे !

    अपना स्नेह एवं सहयोग बनाये रखियेगा !

    ------- क्रिएटिव मंच

    उत्तर देंहटाएं
  27. @ ज्योति शर्मा जी लगता है आपने ध्यान नहीं दिया ! देखिये ऊपर स्पष्ट लिखा है "लेखन में मौलिकता होनी चाहिए ! पंक्तियाँ स्वयं आपके द्वारा रचित होनी चाहिए !"

    आप प्रतियोगिता में शामिल हुयीं इसके लिए हम आपके आभारी हैं

    ------- क्रिएटिव मंच

    उत्तर देंहटाएं
  28. ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★★☆★☆★
    प्रतियोगियों के लिए आवश्यक सूचना
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★★☆★☆★

    प्रतियोगिता में शामिल होने की समय सीमा रविवार शाम चार बजे तक है ! उसके उपरान्त प्रतिक्रिया / प्रविष्टि को परिणाम में शामिल कर पाना संभव नहीं होगा !

    ------- क्रिएटिव मंच

    उत्तर देंहटाएं
  29. सुखी जो देखन मैं गया, सुखी न मिल्या कोए
    जो दिल देखा आपना, मुझ सा सुखी न कोए

    मै पहले ही साफ़ कर दूँ कि यह पंक्तियाँ स्वर्गीय कबीर दास जी की नहीं हैं .... हाँ उनसे 'इंस्पायर्ड' हो सकती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  30. शीर्षक -"अंदाज जीने का"

    ए जिन्दगी मैंने तेरे हर अंदाज़ को जाना
    जीवन के हर रहस्य को जाना
    होने को पहचाना
    सिखा संतुष्टि के महत्त्व को
    सिखा हर हाल में खुश रहना
    यही है अंदाज जीने का !

    उत्तर देंहटाएं
  31. शीर्षक हैं 'मोची'

    देखो खबरे पढ कर मै
    देश को अपने जान रहा हू
    काम से देखो मै भी अपने
    मंजिले आसान बना रहा हू

    काम कोई छोटा होता नही हैं
    इन्सान छोटा या बडा नही हैं
    मै चाहे मोची हू अदना सा
    मंजिले आसान बना रहा हू.

    उत्तर देंहटाएं
  32. आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनायें!
    "ज्ञान से भरपूर मोची" कैसा रहेगा ये शीर्षक !

    उत्तर देंहटाएं
  33. मोची और अखबार की जुगलबंदी

    खबरें जो कील ठोकती हैं
    मुझसे बड़ा कीलठोकक
    आज के समय में
    अखबार है
    हम दोनों का देखिये
    आप कितना प्‍यारा
    साथ है।

    इसे प्रतियोगिता में न शामिल किया जाये क्‍योंकि समय निकल चुका है।

    उत्तर देंहटाएं

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